I am a Well…

I definitely seek belongingness, to someone, somewhere, but, I cant give it away, one more time, to a wrong person. I have limits, like a well.

10 Great Novels for Teenagers (Bibliophile-Part 1)

Are you spending a lot of time on social media and do not feel productive. Well, reading something good is always a good resort. So, here are some suggestions, covering different genres, and A CONSTRUCTIVE READ FOR TEENAGERS Some Indian Authors who are an absolute “Go-To” for every age… These are not only good for…

वह, मैं हूँ !!!

गुमसुम गलियों में जो निहारती नज़रें जिसकी हैं … वह, मैं हूँ ! उन घरों में, जो खाली थे, अब पायल की मीठी धुन है, वह, मैं हूँ ! मोबाइल स्क्रीन पर हिरण की तरह, केंद्रित और अभिनीत, बड़ी आकर्षक आँखें, वह, मैं हूँ ! और … रोज़-रोज़ न्यूज़-चैनल देखने पर डरा-सहमा हुआ एक-सा ध्यान,…

अचानक , एक रात …

मेरी कलम से …(४)… -Aditi Manikpuri बावरा मन उड़ चला , शहर-शहर , गली-गली,  ढूंढने वो मुस्कराहट , जो तुमसे मिलकर थी मिली |  फिर एक रात……… तुम चले आये, लेकर बिसरी बातें, बिन बताये |  बातें ज्यादा मीठी थी या तुम , कुछ कह नहीं सकती , उन बातों के बीच , तुम्हे लबों…

Tell Me O Moon

Moon, O mighty moon… Tonight, I confess , how jealous , I am , of you…. ‘Cos these enchanting poets, crazy in love, write about you. … and not me… They write about your beauty…  So , who’ll write about my kind of beauty? They write about your changing shape… So, who’ll write about my curves…

Peaceful Sleep

We were lying on a mattress over the floor. You were lying straight on your back and my head was rightly placed on your left shoulder with your left hand holding me….. You had your eyes closed , and you were breathing peacefully with small baby snores . I placed my hand over your chest….

नयी-पुरानी क़मीज़ (मेरी कलम से-३)

कैसे अजीब से हैं ना, हम सब कुछ पाना चाहते है।  इतने सारे सपने, इतनी सारी अभिलाषाएं। मगर ये भी सीखना आवश्यक है कि कुछ चीज़ें हमेशा साथ रहेंगी या हमेशा सतत रहेंगी, उन्हें साथ रखना, कभी मत भूलना।  जैसे छोटे बच्चे को कोई नया खिलौना मिलता है , तो वह पुराने खिलौने को भूल…

A Day After Sushant Went… मेरी कलम से (२)

कल दिन भर कुछ लिखना चाहती थी , कल के context पे … लेकिन नहीं लिख पायी . वो चला गया , and I was deeply affected. आखिर क्यों ?क्योकि वो famous था … शायद नहीं . क्योकि उसकी film में से कुछ मेरी favourite बन चुकी थी …. शायद नहीं . क्या मैं उसे…

Sunshine

It is about the Sunshine🌞, that he became, one day! Feel the warmth❤️ with me…

सामर्थ्य

” इस पथ का उद्देश्य नहीं है श्रान्त भवन में टिके रहना किन्तु पहुँचना उस सीमा तक जिसके आगे राह नहीं है। “ ~ जयशंकर प्रसाद यह कविता, महाकवि जयशंकर प्रसाद की इन पंक्तियों से प्रेरित है इस पथ पर बढ़ चलें , हम न थकें, न रुकें ; “पीछे क्या था….. आगे क्या है…